‘दुरित दुःख दैन्य न थे जब ज्ञात अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।’ पंक्ति के रचनाकार हैं? - Gyan Darpan : Learning Portal

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Thursday, 7 November 2019

‘दुरित दुःख दैन्य न थे जब ज्ञात अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।’ पंक्ति के रचनाकार हैं?

Category :  Hindi Grammar

‘दुरित दुःख दैन्य न थे जब ज्ञात अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।’ पंक्ति के रचनाकार हैं?

 

  • (A) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
  • (B) महादेवी वर्मा
  • (C) सुमित्रानंदन पंत
  • (D) जयशंकर प्रसाद

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Answar : (C) सुमित्रानंदन पंत

 

 हिंदी व्याकरण ( Hindi Grammar )श्रेणी के प्रश्न  ‘दुरित दुःख दैन्य न थे जब ज्ञात अपरिचित जरा-मरण-भ्रू पात।।’ पंक्ति के रचनाकार हैं? का सही उत्तर (C) सुमित्रानंदन पंत होगा।

अगर किसी प्रश्न का उत्तर गलत है तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट कर हमें बतायें ।

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